नफरतों की इस दौर में... एक नाव मोहब्बत की भी चलनी चाहिए इस तस्वीर की सुंदरता का शब्दों में बखान नहीं कर सकता , बीते कल में भारत में ऐसी तस्वीरें आम थी .... इतनी आकर्षक नहीं हो पाती यह तस्वीर , आज जब सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफार्म पर एक से बढ़कर एक धार्मिक उन्मादी नारे लगाते , हाथों में तलवार लिए , लाल लाल आंखें किए गांव का सबसे बड़ा मवाली समझा जाने वाला लड़का धार्मिक रंगों का गमछा बांधे अपने धर्म का रक्षक बना चौराहों पर खड़ा फोटो खिंचवाते गर्व से अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया में शेयर कर रहा , फोटो के साथ लगा कैप्शन बता देता है कि दूसरे धर्म के लोगों को मरने मरने पर आमदा है , हर तरफ एक विचित्र सा तनाव है , कोई भी पर्व त्योहार हो कुछ जगहों पर तो पलटन उतारनी पड़ रही पुलिस और फौज की , समाचार में लिखना पड़ रहा- होली शांतिपूर्ण संपन्न बकरीद शांतिपूवर्क.... एक दूसरे पर पूरी तरह हम विश्वास खो चुके हैं , सामने वाले को देखते ही हमारे जेहन में छा जाता है कि सामने जो खड़ा है वो हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है ....फिर तो उसकी हर बात झूठी उसके हर हरकत में साजिश .... जो छोटी-सी सुई के नोक बराबर शक की बुनियाद पड़ी थी वो गहरी खाई में तब्दील हो गई है ......
इसे एक छोटी सी फुंसी से नासूर बनाने में हमारे हुक्मरान और कुछ धार्मिक कट्टरवादी संगठनों के माफियाओं (जैसे असदुद्दीन ओवैसी RSS जैसे संगठन) पेशेवर बेरोजगारों के सहयोग से बहुत मेहनत कर देश को इस मुकाम तक पहुंचा पाए हैं कि... हत्या हो या बलात्कार या फिर भ्रष्टाचार हम पीड़ित और प्रतिवादी की पहले जाति देखते हैं तब जाकर बयान देने की हालत में आ पाते हैं सब कुछ एक रटा रटाया ढर्रा हो गया , कहीं कोई बड़ी कार्यवाही नहीं जो खौफ हो दंगाइयों में ....उल्टे जेल से निकलने के बाद ऐसे लोगों को फूल मालाओं से लाद कर स्वतंत्रता सेनानी की तरह स्वागत किया जा रहा .....हत्या शब्द से लोगों का इतना सामना हो रहा है कि कहीं आने वाले दिन में इस शब्द को सुनकर कोई संवेदना ही पैदा ना हो और हत्या भी सिर्फ एक तरह की नहीं हर तरह की हत्या हो रही ...
खैर कहना यह था कि ऐसी भयावह दौर में भी उम्मीद की किरण जिंदा है , दोनों को देखने से लगा हो सकता है की संख्या बल में उन्मादियों की ताकत ज्यादा हो लेकिन कहीं ना कहीं इंसानियत के फूल खिलाने वाले आज भी मौजूद है ....दिल से सलाम प्रणाम नमन करता हूं इन दोनों को भी और उन्हें भी जिसने सोशल मीडिया के सहारे बहुत बड़े संदेश को विशाल क्षेत्र में फैलाने का काम किया है..... और इश्वर से प्रार्थना करता हूं की ऐसी तस्वीरें इतनी आम हो जाए कि फिर हमारी तवज्जो ऐसी तस्वीरों पर ना जाय ... ईश्वर सद्बुद्धि दें हमारे सत्ताधीशों को ...... जय हिंद 🙏🏻
इसे एक छोटी सी फुंसी से नासूर बनाने में हमारे हुक्मरान और कुछ धार्मिक कट्टरवादी संगठनों के माफियाओं (जैसे असदुद्दीन ओवैसी RSS जैसे संगठन) पेशेवर बेरोजगारों के सहयोग से बहुत मेहनत कर देश को इस मुकाम तक पहुंचा पाए हैं कि... हत्या हो या बलात्कार या फिर भ्रष्टाचार हम पीड़ित और प्रतिवादी की पहले जाति देखते हैं तब जाकर बयान देने की हालत में आ पाते हैं सब कुछ एक रटा रटाया ढर्रा हो गया , कहीं कोई बड़ी कार्यवाही नहीं जो खौफ हो दंगाइयों में ....उल्टे जेल से निकलने के बाद ऐसे लोगों को फूल मालाओं से लाद कर स्वतंत्रता सेनानी की तरह स्वागत किया जा रहा .....हत्या शब्द से लोगों का इतना सामना हो रहा है कि कहीं आने वाले दिन में इस शब्द को सुनकर कोई संवेदना ही पैदा ना हो और हत्या भी सिर्फ एक तरह की नहीं हर तरह की हत्या हो रही ...
खैर कहना यह था कि ऐसी भयावह दौर में भी उम्मीद की किरण जिंदा है , दोनों को देखने से लगा हो सकता है की संख्या बल में उन्मादियों की ताकत ज्यादा हो लेकिन कहीं ना कहीं इंसानियत के फूल खिलाने वाले आज भी मौजूद है ....दिल से सलाम प्रणाम नमन करता हूं इन दोनों को भी और उन्हें भी जिसने सोशल मीडिया के सहारे बहुत बड़े संदेश को विशाल क्षेत्र में फैलाने का काम किया है..... और इश्वर से प्रार्थना करता हूं की ऐसी तस्वीरें इतनी आम हो जाए कि फिर हमारी तवज्जो ऐसी तस्वीरों पर ना जाय ... ईश्वर सद्बुद्धि दें हमारे सत्ताधीशों को ...... जय हिंद 🙏🏻

1 comment:
जय हो जय जय हो
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