JNU चुनाव समिति ने एक बयान में कहा कि उन्होंने मतगणना कुछ समय के लिए रोक दी है वामपंथी छात्र संगठनों के सदस्यों ने एबीवीपी पर हंगामा करने का आरोप लगाया और एबीवीपी ने आरोपों को खारिज किया है.
वामपंथी संगठन के छात्रों के अनुसार, ‘मतगणना प्रक्रिया 14 सितंबर को रात 10 बजे शुरू हुई लेकिन मतगणना कक्ष में जबरन घुसने और सीलबंद मतदान पेटियों तथा मतपत्रों को छीन कर ले जाने की कोशिश होने के बाद मतगणना रोक दी गई.’ उन्होंने दावा किया कि महिलाओं सहित उनके सदस्यों को धमकाया गया. वाम धड़े ने दावा किया कि सुबह करीब चार बजे एबीवीपी ने इंटरनेशनल स्टडीज बिल्डिंग स्कूल के शीशे तोड़ दिए. इसके बाद EC ने मतगणना रोक दी
वहीं ABVP नेता ने कहा, EC का वामपंथियों के प्रति झुकाव है इसलिए हमने शांतिपूर्वक प्रदर्शन किया। हमने कोई हंगामा नहीं किया.’ जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) चुनावों में छात्रों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और कुल 67.8 प्रतिशत मतदान हुआ जिसे छह वर्षों में सबसे अधिक माना जा रहा है। इसमें 5,000 से अधिक छात्रों ने मतदान किया.
वाम समर्थित ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (ISA), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (DSF) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) इस बार ‘यूनाइटेड लेफ्ट’ गठबंधन बना कर चुनाव लड़ रहे हैं.
वामपंथी धड़े के अलावा ABVP , NSUI (नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया) और BPSA (बिरसा आंबेडकर फुले छात्र संघ) के उम्मीदवार मैदान में हैं

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